आज सड़कों पर भीख मांग रहीं इस यूनिवर्सिटी की वाइस प्रेसीडेंट,डबल MA करने के बाद भी…

नई दिल्ली. आज हम आपको ऐसी महिला की कहानी बताने जा रहे हैं जो कभी कुमाऊं यूनिर्सिटी की वाइस प्रेसीडेंट रह चुकी हैं…. राजनीति और इंग्लिश जैसे विषयों में उन्होंने डबल एमए किया है…  कैंपस के सभी छात्र-छात्राओं को लगता था कि एक दिन हंसी प्रहरी कुछ बड़ा करेंगी और उनका बड़ा नाम होगा… लेकिन अचानक हंसी की जिंदगी ने ऐसी पलटी मारी की उसके सारे सपने अधूरे रह गए और अब वह सड़कों पर भीख मांग रही हैं…..

जानकारी के मुताबिक, हंसी प्रहरी अल्मोड़ा जिले के रणखिला गांव की रहने वाली हैं.. वह अपने पांच भाई-बहनों में से सबसे बड़ी है। हंसी की होशियारी की पूरा गांव दाद देता था और उनकी पढ़ाई के पूरे गांव में चर्चे होते थे… उनके पिता छोटा-मोटा काम करते थे और अपने बच्चों को पढ़ाने में उन्होंने दिन रात एक कर दिया था.. …. गांव से छोटे से स्कूल से पास होकर हंसी कुमाऊं विश्वविद्यालय में दाखिला लिया तो घरवालों की उम्मीदें बढ़ गई..हंसी पढ़ाई के साथ-साथ बाकी एक्टिविटिज में भी भाग लेती थी… वह ज्यादा चर्चा में तब आईं जब उन्होंने कुमाऊं यूनिवर्सिटी के छात्र यूनियन का चुनाव जीता और वह वाइस प्रेसिडेंट बनी.. इसके बाद तो हंसी कैंपस में बैठकर राजनीतिक विषयों पर चर्चा किया करती थी.. उनकी बातें सुनकर और राजनीति और फर्राटेदार उनकी अंग्रेजी को सुनकर सबको यही लगता था कि एक दिन हंसी कुछ ऐसा करेगी की सबको उन पर गर्व होगा.. लेकिन शादी के बाद उनकी किस्मत ऐसी बदली की वह खुद को भूल गई और कई सालों पर अब उन्हें लग रहा है कि अगर उनकी कोई मदद करें तो वो जरूर कुछ करती सकती हैं और फिर से अपनी जिंदगी जी सकती हैं…..


चार साल की नौकरी
हंसी के मुताबिक उन्होंने करीब चार साल यूनिवर्सिटी में नौकरी की हैं.. यह नौकरी उन्हें इसलिए मिली थी क्योंकि वह एजुकेशन के साथ सभी प्रतियोगिताओं में भाग लेती थी.. इसके बाद उन्होंने कुछ दिन प्राइवेट जॉब भी की। 2011 के बाद हंसी की जिंदगी अचानक से बदल गई.. उन्होंने यह बताने से साफ-साफ इंकार कर दिया.. हंसी ने कहा कि वह नहीं चाहती कि उनकी वजह से उसके परिवार के किसी सदस्य को परेशानी हो…हंसी ने बताया कि वह इस वक्त जिस तरह की जिंदगी जी रही हैं, वह शादी के बाद हुई आपसी विवाद का नतीजा है।


दोबारा से जिंदगी शुरु करना चाहती हैं हंसी
शादीशुदा जिंदगी में हुई उथल-पुथल के बाद हंसी कुछ समय तक तनाव में रहीं और इसके बाद  परिवार के लोगों ने हरिद्वार में बसने का फैसला लिया… तब से ही वो अपने परिवार से अलग हैं। वो बताती हैं कि इस दौरान उनकी शारीरिक स्थिति भी गड़बड़ रहने लगी और वह सक्षम नहीं रहीं कि कहीं नौकरी कर सकें। हालांकि अब उन्हें लगता है कि यदि उनका इलाज हो तो उनकी जिंदगी पटरी पर आ सकती है। वह फिर से अपनी जिंदगी की शुरुआत कर सकती हैं… 



सीएम से भी कर चुकी हैं अपील 
हंसी ने बताया कि वह 2012 के बाद से ही हरिद्वार में भिक्षा मांग कर अपना और अपने छह साल के बच्चे का पालन-पोषण कर रही हैं। बेटी नानी के साथ रहती है और बेटा उनके साथ ही फुटपाथ पर जीवन बिता रहा है…..वह खुद कई बार मुख्यमंत्री को पत्र लिख चुकी हैं कि उनकी सहायता की जाए। कई बार सचिवालय विधानसभा में भी चक्कर काट चुकी हैं। इस बात के दस्तावेज भी हंसी के पास मौजूद हैं। वह कहती हैं कि अगर सरकार उनकी सहायता करती है तो आज भी वह बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सकती हैं।






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