ऑक्सीजन क्राइसिस : हाईकोर्ट ने कहा-यह नरसंहार है, केंद्र शुतुरमुर्ग सी गर्दन रेत में डाल छिप सकती है, हम नहीं

New Delhi : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को लखनऊ और मेरठ के डीएम को उन खबरों को सत्यापित करने का निर्देश दिया है, जिसमें जिक्र है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण कोरोना रोगियों को जान गंवानी पड़ी। अदालत ने कहा- ऑक्सीजन की कमी की वजह से लोगों की जान जाना एक आपराधिक कृत्य और नरसंहार है। मेडिकल ऑक्सीजन की निरंतर खरीद और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार अफसरों पर नरसंहार का केस होना चाहिये। जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और अजीत कुमार की खंडपीठ ने पूछा- हम इस तरह से लोगों को कैसे मरने दे सकते हैं? जब चिकित्सा विज्ञान इतना आगे बढ़ गया है कि हृदय प्रत्यारोपण और मस्तिष्क सर्जरी अब एक वास्तविकता है। न्यायाधीशों ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि सरकार को तत्काल इस व्यवस्था को दुरुस्त करना होगा। अदालत ने 48 घंटे के भीतर अफसरों को समाचार रिपोर्टों की पड़ताल करने और सुनवाई की अगली तारीख शुक्रवार तक अपनी रिपोर्ट देने को कहा है। अधिकारियों को सुनवाई के लिए उपस्थित होने का भी निर्देश दिया गया है।

इधर दूसरी ओर दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी को ऑक्सीजन की आपूर्ति के मसले पर केंद्र पर कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने पूछा कि 1 मई के कोर्ट के आदेश का पालन न करने और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ अवमानना ​​कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए। जस्टिस विपिन सांघी और रेखा पल्ली की खंडपीठ ने कहा- यह हमारे ध्यान में लाया गया है कि दिल्ली को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद 700MT ऑक्सीजन प्राप्त नहीं हुई है। इससे पहले भी 490MT की मात्रा वितरित नहीं की गई थी। सर्वोच्च न्यायालय को एसजी तुषार मेहता द्वारा आश्वासन दिया गया था कि दिल्ली ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं होगी। दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी पर, उच्च न्यायालय ने केंद्र से कहा- आप शुतुरमुर्ग की तरह रेत में अपना सिर डालकर छिप सकते हैं, हम तो नहीं छिप सकते हैं। छोटे, बड़े नर्सिंग होम रोज हमारे पास आ रहे हैं कि ऑक्सीजन नहीं है। उन्होंने कहा- हम इस बात को खारिज करते हैं कि दिल्ली सरकार मौजूदा बुनियादी ढाँचे के प्रकाश में 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन प्राप्त करने की हकदार नहीं है। यह हमें इस बात की पीड़ा देता है कि ऑक्सीजन की आपूर्ति के पहलू को केंद्र द्वारा देखा जाना चाहिए। अब तो स्थिति यह हो गई है कि अस्पतालों को बेड की संख्या कम करनी होगी। उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्र सरकार के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में सुनवाई शुरू होने से पहले बुधवार को मौजूद रहें। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 1 मई को केंद्र को राष्ट्रीय राजधानी या चेहरे की अवमानना ​​के लिए 490 मीट्रिक टन आवंटित ऑक्सीजन की आपूर्ति करने का निर्देश दिया था।
इसी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ऑक्सीजन की कमी की ख़बरों में दिख रहा है कि जिला प्रशासन और पुलिस के लोग उन गरीब नागरिकों को परेशान कर रहे हैं, जो अपने निकट और प्रियजनों के जीवन को बचाने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की भीख मांग रहे थे। आदेश में रविवार को मेरठ मेडिकल कॉलेज में एक नए ट्रॉमा सेंटर के गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में पांच मरीजों की जान जाने और लखनऊ के सूर्य अस्पताल में मृत्यु के बारे में समाचार रिपोर्टों का उल्लेख किया। अदालत ने मेरठ के एक अन्य निजी अस्पताल में भी इसी तरह की मौतों पर रिपोर्ट का उल्लेख किया, जहां प्रबंधन ने स्वीकार किया कि कोरोना रोगियों को देने के लिये ऑक्सीजन नहीं है। कोर्ट ने कहा – इन समाचारों से साफ हो गया है कि वास्तविक तस्वीर सरकारी दावों से बिलकुल अलग है।

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