भारत किसी भी नापाक कोशिश को नाकाम करने में सक्षम,हम अपने लोगों की किसी भी कीमत पर रक्षा करेंगे

New Delhi: स्वदेशी की ताकत की झलक दिखाते एयर शो के साथ एयरो इंडिया की बेंगलुरुमें शुरुआत हुई। एयरो इंडिया के पहले दिन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को इंडियन एयरफोर्स के लिए 83 लाइट कॉम्बेट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस का कॉन्ट्रैक्ट भी दिया गया। यह कॉन्ट्रैक्ट करीब 48 हजार करोड़ रुपये का है। एयरो शो के उद्घाटन में एचएएल के अलग अलग एयरक्राफ्ट ने आत्मनिर्भर फॉर्मेशन फ्लाइट में उड़ान भरी। एयर शो में तेजस के साथ यूएस एयरफोर्स के बी-1बी लॉग रेंज सुपरसोनिक हेवी बॉमर एयरक्राफ्ट ने भी उड़ान भरी। यूएस एंबेसी के मुताबिक पहली बार यूएस बॉमर एयरक्राफ्ट भारत में उतरा है।

‘भारत किसी भी नापाक कोशिश को नाकाम करने में सक्षम’
13 वें एयरो इंडिया के उद्घाटन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हमने अपने विवादित बॉर्डर में यथास्थिति में बदलाव की दुर्भाग्यपूर्ण कोशिश होते देखी है। भारत सतर्क है और इस तरह की किसी भी कोशिश को नाकाम करने में पूरी तरह सक्षम है। भारत अपनी संप्रभुता और अपने लोगों की किसी भी कीमत पर रक्षा करने में सक्षम है। रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारी डिफेंस क्षमता लगातार बढ़ रही है। हमने मिलिट्री मॉर्डनाइजेशन के लिए अगले 7-8 साल में 130 बिलियन डॉलर खर्च करने की योजना बनाई है। उन्होंने कहा कि भारत ने कई फ्रंट पर चुनौतियां झेली हैं और भारत स्टेट प्रायोजित आतंकवाद का शिकार भी है, जो अब एक ग्लोबल खतरा है।

इंडियन ओशन रीजन में गुरुवार को होगी कॉन्क्लेव
गुरुवार को एयरो इंडिया में इंडियन ओशन रीजन की कॉन्क्लेव भी होनी है। जिसका जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की काफी विस्तृत कोस्टललाइन है, लेकिन हमारा इंटरेस्ट हमारे तटीय किनारों से आगे भी है। इसमें हमारे वह लोग भी शामिल हैं जो अलग अलग महाद्वीपों में रहते हैं और काम करते हैं खासकर इंडियन ओशन रीजन में। उन्होंने कहा कि यह हमारा फर्ज है कि हम प्राकृतिक आपदा के वक्त और सुरक्षा को लेकर चुनौतियों के वक्त उन्हें मदद दें और इसके लिए पूरी तरह सक्षम रहें।

सबसे बड़ा मेक इन इंडिया डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट का दावा
तेजस फाइटर जेट के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन होने पर राजनाथ सिंह ने कहा कि यह कॉन्ट्रैक्ट अब तक का सबसे बड़ा मेक इन इंडिया डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट है। इसमें 73 तेजस मार्क-1ए फाइटर एयरक्राफ्ट शामिल हैं और 10 तेजस मार्क-1 ट्रेनर। पहले तेजस की डिलीवरी 36 महीने में होगी और उसके 6 साल बाद सभी 83 तेजस की डिलीवरी हो जाएगी। एचएएल ने प्रॉडक्शन में तेजी लाने के लिए अपनी दूसरे असेंबली लाइन भी स्थापित की है। जिससे हर साल 8 एयरक्राफ्ट की बजाय हर साल 16 एयरक्राफ्ट बनाए जा सकें। एचएएल के अधिकारियों के मुताबिक जरूरत के मुताबिक तीसरी असेंबली लाइन भी बनाई जा सकती है। तेजस का जो मौजूदा वेरियंट एयरफोर्स के पास है उससे नया तेजस मार्क-1 ए ज्यादा अपग्रेडेट है। इंडियन एयरफोर्स ने पहले 40 एलसीए तेजस का ऑर्डर किया था। इससे एयरफोर्स की दो स्क्वॉड्रन बननी हैं। इनमें से 16 तेजस डिलीवर हो गए और जुलाई 2016 में एयरफोर्स में तेजस की पहली स्क्वॉड्रन भी बन गई।

source- Navbharat Times

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *