RO का पानी पी रहे हैं तो हो जाएं सावधान, आपकी सेहत से हो रहा खिलवाड़

Agra: ताजनगरी में पानी आपूर्ति करने वाली एजेंसियां भी इस बात पर जोर देती हैं कि उनका पानी सौ फीसदी शुद्ध है, लेकिन हकीकत यह है कि यहां सबसे ज्यादा आरओ वॉटर प्‍यूरीफायर ही बिक रहे हैं। करीब दो साल पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने केंद्र व राज्‍य सरकारों से कहा है कि जिन इलाकों में पानी ज्यादा खारा नहीं है, वहां आरओ के इस्तेमाल पर बैन लगाया जाए क्योंकि इससे पानी की बहुत बर्बादी होती है और यह सेहत के लिए मुफीद भी नहीं है। शहरों में पानी आपूर्ति करने वाली एजेंसियां भी इस बात पर जोर देती हैं कि उनका पानी सौ फीसदी शुद्ध है, लेकिन हकीकत यह है कि ताजनगरी में सबसे ज्यादा आरओ वॉटर प्‍यूरीफायर ही बिक रहे हैं या फ‍िर मिनरल वाटर के नाम पर लोगों को कुछ प्लांट संचालित करने वाले चिल्ड वाटर दे रहे हैं।

14 प्‍लांट की अनुम‍त‍ि, अन्‍य गैरकानूनी

नगर निगम क्षेत्र में आरओ प्लांट लगे हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) से मात्र 14 प्‍लांट को ही अनुमति है, जबक‍ि यहां करीब एक हजार प्‍लांट बिना लाइसेंस संचालित हो रह‍े है। गर्मी में आरओ वाटर के नाम पर शहर में करोड़ों का करोबार हो रहा है। दुकानों, ऑफिसेस और घरों में आपूर्ति होने वाले इस पानी को लोग सेहतमंद समझकर पी रहे हैं, लेकिन शायद उन्हें पता नहीं कि आरओ वाटर के नाम पर सिर्फ नल का पानी ही ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। इसकी शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है।

स्‍वयं तय करते है पानी का रेट

पानी के धंधे की आड़ में काले कारोबारी वाटर कैन की बिक्री के रेट भी स्‍वयं तय कर लेते हैं। कंपनियों में रेट अलग और घरों में अलग रेट पर पानी आपूर्ति किया जा रहा है। एक वाटर कैन में 15- 20 लीटर तक पानी आता है और यह 15 से 30 रुपए तक मार्केट में बेचा जा रहा है। कुछ लोग छोटे-छोटे दुकानदारों तक 15-20 रुपये में 15 लीटर के वाटर कूलर में पानी की आपूर्ति कर रहे हैं।

हार्मफुल है टीडीएस की ज्यादा मात्रा

आपूर्ति किए जा रहे पानी में टीडीएस की मात्रा खतरनाक स्तर पर पहुंच जाती है। जो शरीर के लिए काफी हार्मफुल है। पानी के प्योरिफिकेशन के दौरान कार्बनिक और अकार्बनिक तत्व शरीर की जरूरत के मुताबिक कम दिए जाते हैं। पानी में मैग्निशियम, कैल्शियम, पोटेशियम की एक निश्चित मात्रा स्वास्थ्य के लिए जरूरी होती है। इसकी जांच टीडीएस (टोटल डिसॉल्वड सॉलिड्स) के जरिए की जाती है। वाटर कैन में आपूर्ति किए जाने वाली पानी के सप्लाई में टीडीएस की मात्रा 300 पीपीएम तक होती है, जो शरीर के लिए खतरनाक है।

ब्रांड के नाम पर डुप्लिकेट पानी की आपूर्ति

गर्मी में मिनरल वाटर की खपत बढ़ने से अवैध प्लांट के व्यापारी ब्रांड के नाम पर डुप्लिकेट पानी की आपूर्ति कर रहे हैं। कैंट, स‍िकंदरा, रुककता, ईदगाह, नामनेर, राजा की मंडी व ईदगाह रेलवे स्टेशन और बस अड्डा समेत शहर में कई ऐसे व्यस्ततम इलाके हैं, जहां बड़े पैमाने पर ब्रांडेड मिनरल वाटर से मिलते-जुलते नाम की पानी की बोतलें महंगे दाम में बिक रही हैं। इससे दुकानदार से लेकर प्लांट संचालक तक मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।

मजबूरी का बहाना

एफएसडीए के अधिकारियों का कहना हैं कि यह सही है कि शहर में अवैध रूप से वाटर कैन में पानी आपूर्ति किया जा रहा है। जिसकी शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है, लेकिन ऐसे लोगों के लिए कोई नियम या रेगुलेशन नहीं है। इसलिए फूड एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट इनकी निगरानी नहीं कर सकता। ( एफएसएसएआई) फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड ऑफ इंडिया का कंट्रोल भी सिर्फ पैक्ड चीजों पर ही नजर रखता है।

ये है मानक

50-150 पीपीएम -सबसे अच्छा पानी

150-200पीपीएम – अच्छा

200-300 पीपीएम-स्वच्छ

300-500 पीपीएम- खराब व नुकसानदायक

ये है जरूरी

-पैक्ड मिनरल वाटर प्लांट के लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंटर्ड का लाइसेंस जरूरी।

-फूड एंड सेफ्टी एक्ट के तहत किसी मिनरल वाटर प्लांट को संचालित करने के लिए भूगर्भ जल संचय विभाग से एनओसी लेना जरूरी

-प्लांट लगाने से पहले वाटर हारवेस्टिंग की व्यवस्था जरूरी है

-कामर्शियल एरिया में होना चाहिए प्लांट

ये है प्लांट की वर्किंग

– पानी में गंदगी और तलछट रेत को फिल्टर करना।

– बारीक कार्बन, फिल्टर पानी से क्लोरीन और नए आर्गेनिक्स गंध के जरिए गंदगी को कम करना।

– हानिकारक केमिकल को खत्म करना।

– खनिज को जरूरत के हिसाब से मेंटेन रखना।

लोग अब इंफ्रारेड थर्मामीटर ज्यादा खरीद रहे हैं।

ये होना जरूरी मिनरल वाटर में

– फ्लोराइड 0.5 से 1.5 मिलीग्राम

– घुलनशील लवण 500 से 1500 मिग्रा

– नाइट्रेट 0 से 45 मिलीग्राम

– क्लोराइड 10 से 500 मिलीग्राम

– पीएचपीए 6.5 से 8.5 मिलीग्राम

(डब्ल्यूएचओ के तैयार किए गए मापदंड के अनुसार)

उबाल कर प्रयोग करें पानी

वर‍िष्‍ठ बाल रोग विशेषज्ञ डा. जेएन टंडन ने कहा कि सभी तरह के आरओ का पानी शुद्ध नहीं है। बाजार में बड़े कैन में बिकने वाले पानी की शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है। इसके शुद्धता की जांच भी नहीं होती है। प्लांट पर साफ-सफाई का इंतजाम नहीं होता। इस पानी से बेहतर है कि पानी का उबाल कर पिया जाए।

शरीर के लिए मरकरी, फ्लोराइड, क्लोरीन के साथ-साथ मैग्निशियम, कैल्शियम और सोडियम जैसे तत्व पानी में जरूरी होते हैं। इसलिए टीडीएस की जांच जरूरी होती है। इससे पानी की शुद्धता का पता चलता है।

– डा बलबीर स‍िंंह व‍िभागाध्‍यक्ष मेड‍िसन एसएन मेडिकल कॉलेज एंव अस्‍पताल आगरा

रजिस्टर्ड पैक्ड मिनरल वाटर की समय-समय पर जांच की जाती है। अन्‍य से विभाग का कोई मतलब नहीं है।

– अम‍ित कुमार स‍िंंह मुख्‍य अभिहित अधिकारी एफएसडीए

(Source – Dainik Jagran)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *