कफन के कारोबार ने आसमान छुआ : 24 घंटे कामगार बुन रहे कफन, फिर भी पूरा नहीं हो रहा आर्डर

New Delhi : कोरोना काल में अधिकांश बिजनेस का और बिजनेसमैन का हाल बुरा है लेकिन कफन का कारोबार आसमान छू रहा है। कामगार 24 घंटे लगातार कपड़ा बुननेवाली मशीनों पर काम कर रहे हैं लेकिन क्या मजाल की आर्डर पूरा हो जाये। दैनिक भास्कर के रिपोर्टर ने इस बिजनेस परिदृश्य पर विस्तृत रिपोताज पेश किया है। रिपोर्ट की मानें तो जबरदस्त डिमांड की वजह से बिहार के गया में चादर-गमछे बनाने वाले बुनकर अब पूरी तरह कफन तैयार करने में लग गये हैं। फरवरी-मार्च माह में यहां से हर दिन 15-20 हजार पीस कफन की सप्लाई होती थी, जो अब बढ़कर 40-50 हजार तक हो गई है। भास्कर रिपोर्टर दीपेश ने कफन बनाने में लगे पटवाटोली का जायजा लिया और देखा कि जब रोजगार खत्म हो रहे हैं, उस दौर में अब यह एक काम है, जिसमें लगे कामगारों को दिन-रात एक पल की फुर्सत नहीं है।

गमछा-चादर के लिए मशहूर, अब दिन-रात कफन की सिलाई
मानपुर का पटवा टोली न केवल गमछा, चादर व कफन बल्कि हर साल बड़ी तादाद में आईआईटीयन की फसल तैयार कर देश को देता है। ऐसे तो पटवाटोली के बुनकरों का मुख्य पेशा सूती गमछे और चादर तैयार करना है। इनमें से केवल छह कारोबारी ऐसे हैं, जो गमछे के साथ पूरे साल कफन भी तैयार करते हैं। इनमें कुछ बड़े कारोबारी हैं, तो कुछ छोटे। बड़े कारोबारी लूम मशीन से कफन तैयार करते हैं, तो छोटे कारोबारी हाथ मशीन से। कफन कारोबारी द्वारिका प्रसाद कहते हैं- अभी सिर्फ मेरे पास हर दिन 15-20 हजार कफन तैयार करने का आर्डर है। यह तेजी अप्रैल माह से आई है। इसके पहले फरवरी-मार्च में सभी कारोबारियों को मिलाकर कुल आर्डर 15-20 हजार प्रतिदिन का था। यहां मुख्यतः छह कारोबारी हैं। अभी सबके पास अच्छे ऑर्डर हैं। कुल मिलाकर यहां से हर दिन 40-50 हजार पीस की सप्लाई की जा रही है।
द्वारिका प्रसाद आगे कहते हैं – इन दिनों गमछे-चादर का करोबार पूरी तरह से मंदा हो गया है। इसके ऑर्डर ही नहीं हैं। ऑर्डर हैं तो सिर्फ और सिर्फ कफन के। यही वजह है कि इन दिनों 24 घंटे काम करना पड़ रहा है। तब जाकर समय पर ऑर्डर की भरपाई हो पा रही है। बातचीत के दौरान द्वारिका प्रसाद कुछ पल के लिए अचानक से दुखी भी नजर आते लगते हैं। रुआंसे अंदाज में बोल पड़ते हैं कि भाई, कोरोना ने तो हजारों-हजार की संख्या में घरों को उजाड़ दिया। अगर ऐसा नहीं है तो इतने ऑर्डर नहीं आते। इतनी डिमांड अपने 45 साल की जिंदगी में कभी नहीं देखी।
हाथ वाले कामगार भी हर रोज 3-5 हजार कफन बना रहे
इसी इलाके में हाथ मशीन पर काम करने वाले सुरेश तांती का कहना है कि बीते 25 दिनों से कफन की मांग बढ़ गई है। हर दिन तीन से पांच हजार पीस कफन तैयार किया जा रहा है। पूरा परिवार लगा हुआ है। यह समस्या फरवरी-मार्च में नहीं थी। उन दिनों एक-दो हजार पीस के ही आर्डर हुआ करते थे। इसी काम में लगे डोलेसर पटवा कहते हैं- अप्रैल की बात ही अलग थी। ऑर्डर की संख्या देख कुछ क्षण के लिए मन दुखी हो जाता है। पर क्या करें, यही रोजी-रोटी है तो पेट पालने और बच्चों के लिए काम करना ही पड़ेगा। बीते 20 दिनों से हर दिन 4-5 हजार पीस के ऑर्डर कई जिलों के थोक विक्रेताओं से आ रहे हैं। (Input- Dainik Bhaskar)

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