भारतीय सेना में शामिल होगा ये स्वदेशी ड्रोन, 65000 फीट की ऊंचाई पर 90 दिनों तक लगातार उड़ेगा

New Delhi:  Infinity सौर ऊर्जा पर चलता है. इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह 65,000 फीट की ऊंचाई पर लगातार 90 दिनों तक उड़ सकता है. यह भारत के ड्रोन वॉरफेयर प्रोग्राम CATS यानी Combat Air Teaming System का अहम हिस्सा होगा.

भारत की सैन्य क्षमता में अगले कुछ सालों में एक ऐसे स्वदेशी ड्रोन की शक्ति जुड़ने वाली है, जो अल्ट्रा हाई एल्टीट्यूड यानी अत्यधिक ऊंचाई पर उड़ सकता है. NDTV ने सबसे पहले-पहल 2017 की अपनी एक रिपोर्ट में इस ड्रोन की जानकारी दी थी. तबसे अबतक इस ड्रोन के निर्माण में काफी तेजी आई है और अगले 3 से 5 सालों में इसे भारतीय सेनाओं की सेवा में शामिल किया जा सकता है.

इस ड्रोन को Infinity नाम दिया गया है और यह सौर ऊर्जा पर चलता है. इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह 65,000 फीट की ऊंचाई पर लगातार 90 दिनों तक उड़ सकता है. यह ड्रोन भारत के ड्रोन वॉरफेयर प्रोग्राम CATS यानी Combat Air Teaming System का अहम हिस्सा होगा.

इस ड्रोन का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, बेंगलुरु की स्टार्ट-अप NewSpace के साथ मिलकर कर रही है. यह स्टार्टअप कंपनी कटिंग-एज ड्रोन तकनीकी पर काम करती है. इस प्रोग्राम में करीब से काम कर रहे एक सूत्र ने बताया कि ‘भविष्य की युद्धक आवश्यकताओं के मद्देनज़र हवा में काम करने वाले अत्याधुनिक प्लेटफॉर्मों का पूरा-पूरा इस्तेमाल करने का अगला चरण इतनी ऊंचाई पर पहुंच के आधार पर तय होगा.’

इस ड्रोन में अलग-अलग तरह के सेंसर लगे हुए हैं, जिनमें एक उत्कृष्ट सिंथेटिक अपर्चर रडार भी शामिल है. इनफिनिटी हवा में उड़ते हुए दुश्मन क्षेत्र के अंदर स्थित टारगेट पर नजर रखेगा और अटैक मिशन को अंजाम देने वाले दूसरे भारतीय ड्रोन सिस्टम के साथ कोऑर्डिनेट करेगा.

इनफिनिटी, अटैक करने वाले ड्रोन्स से एक लाइव वीडियो का फीड, नीचे ग्राउंड पर मॉनिटरिंग स्टेशन तक रिले करने की क्षमता भी रखता है. इससे मानवरहित ड्रोन अटैक के मिशन में विजुअल कन्फर्मेशन मिलने में आसानी होगी. 2019 के बालाकोट स्ट्राइक में भारत के पास ऐसा कोई वीडियो नहीं था, जिसके चलते इस मिशन की सफलता को लेकर बहुत से सवाल उठे थे.

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स का यह भी कहना है कि इनफिनिटी ड्रोन बस मिलिट्री ऑपरेशन्स में ही सहायक नहीं होगा बल्कि आपदा प्रबंधन, स्मार्ट सिटी और प्राकृतिक स्रोतों के प्रबंधन से जुड़ी सेवाएं देने के लिए अपनी इंफ्रा-रेड और इमेजिंग पेलोड तकनीक का इस्तेमाल भी कर सकता है. इसे राहत बचाव कार्यों के लिए गृहमंत्रालय की ओर से और तटीय जलमार्गों पर नजर रखने के लिए जहाजरानी मंत्रालय की ओर से तैनात किया जा सकता है.

एक सामान्य सैटेलाइट को बनाने, लॉन्च करने और उसे ऑपरेट करने में जितनी लागत लगेगी, उससे काफी कम के ऑपरेशनल कास्ट पर बना इनफिनिटी जैसा सिस्टम ‘4G और 5G सेवाओं की क्षमता को और बढ़ा सकता है क्योंकि इससे काफी हद तक सैटेलाइट और टेरेस्ट्रियल नेटवर्क को जमीन से आकाश में शिफ्ट किया जा सकता है.’

source- NDTV INDIA

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