मीना कुमारी को ‘बैजू बावरा’ फिल्म से मिली पहचान, इनके आगे सुपरस्टार भी भूल जाते थे डायलॉग

New Delhi :  चांद तन्हा है आसमां तन्हा, दिल मिला है कहां-कहां तनहा…बुझ गई आस, छुप गया तारा…थरथराता रहा धुआं तन्हा, जिंदगी क्या इसी को कहते हैं, जिस्म तन्हा है और जां तन्हा। आपने ये गजल तो सुनी ही होगी। ये वो गजल है जो मीना कुमारी की सबसे फेमस गजलों में से अक थी। जिसके माध्यम से मीना कुमारी ने अपनी जिंदगी का नजरिया पेश किया था। जी हाँ, मीना कुमारी वह एक्ट्रेस थीं जो गजले लिखने और गाने के लिए मशहूर थीं। लेकिन आज हम उनकी गजल और मीना की अचानक से बात क्योॆ कर रहें हैं, दरअसल बात ये है कि आज मीना कुमारी का जन्मदिन है।

मीना कुमारी का नाम लेते ही वो ब्लैक एंड व्हाइट का दौर याद आ जाता है। जी हाँ, मीना 90 के दशक की फेमस एक्ट्रेस रही हैं। प्यारा सा चेहरा और भोली- सी मुस्कान लिए मीना ने लंबे समय तक लोगों के दिल पर राज किया है। आज यानी 1 अगस्त के दिन ही मीना ने मुंबई के दादर में जन्म लिया था।

मीना को फिल्म इंडस्ट्री की ट्रेजडी क्वीन कहा जाता था। जी हाँ, उनका जीवन बहुत मुश्किल दौर से गुजरा था। उनका असली नाम महजबीं बानो था। आपको बता दें कि जब मीना कुमारी का जन्म हुआ था। तो उनके पिता अली बख्श और मां इकबाल बेगम के पास डॉक्टर को देने के लिए पैसे तक नहीं थे। दोनों ने यह तय कर लिया था कि वह बच्ची को मुस्लिम यतीमखाने में दे देंगे। देकर आ भी गए लेकिन पिता का मन नहीं माना और वापस जाकर बच्ची को घर ले आए।

मीना कुमारी ने कभी स्कूल जाकर पढ़ाई नहीं की। उन्हें घर से ही शिक्षा मिली, बावजूद इसके उन्हें कई भाषाओं का ज्ञान था। उन्हें शायरी और कविताएं लिखना बेहद पसंद था। उनके इस शौक ने उन्हें और गुलजार को नजदीक लाया, लेकिन वह कमाल अमरोही से शादी कर चुकी थीं। मीना कुमारी ने अपनी कई कविताएं गुलजार के पास छोड़ रखी थी।

मीना ने 7 साल की छोटी उम्र से ही फिल्मों काम करना शुरू कर दिया था। उन्होंने पहली फिल्म ‘फरजद ए हिंद’ में काम किया था। ‘बैजू बावरा’ फिल्म से उन्हें अच्छी खासी पहचान मिली, जो कि 1952 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म ने मीना कुमारी को बेस्ट एक्ट्रेस फिल्मफेयर अवार्ड भी दिलवाया था। वह यह अवार्ड पाने वाली पहली अभिनेत्री थी।

इसके बाद लगातार सफलता की सीढ़िया चढ़ती गई। 1951 में तमाशा फिल्म के सेट पर मीना कुमारी की मुलाकात डायरेक्टर कमाल अमरोही से हुई। अगले साल ही दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद कमाल ने मीना कुमारी पर शक करना शुरू कर दिया था। मीना पर कई पाबंदियां थी लगा दी। जैसे-तैसे इन दोनों का यह रिश्ता चलता रहा था। 1964 में दोनों का तलाक हो गया।

पति कमाल अमरोही से अलग होने के बाद मीना की नजदीकियां धर्मेंद्र से बढ़ने लगी। कहा जाता है कि मीना धर्मेंद्र को बहुत पसंद करती थी।अपनी शोहरत के बल पर मीना कुमारी ने धर्मेद्र के करियर को ऊंचाइयों तक ले जाने की पूरी कोशिश की, लेकिन इतना सब करने के बाद भी मीना को धर्मेद्र से भी बेवफाई ही मिली। जी हाँ धर्मेंद्र ने मीना को धोखा दिया। उसके बाद मीना को अकेलापन उबाऊ लगने लगा।

धर्मेद्र की बेवफाई को मीना झेल न सकीं और हद से ज्यादा शराब पीने लगीं। वो दिन रात नशे में डूबी रहती थीं। वह रातभर सोती नहीं थीं। इस वजह से उन्हें लीवर सिरोसिस बीमारी हो गई। बताया जाता है कि दादा मुनि अशोक कुमार से मीना कुमारी की ऐसी हालत देखी नहीं जाती थी। उन्होंने उनके साथ बहुत-सी फिल्मों में काम किया था। वह एक दिन मीना के लिए दवाइयां भी लेकर गए थे, लेकिन उन्होंने दवा लेने से इनकार कर दिया। मीना कुमारी महज 39 साल की उम्र में मतलबी दुनिया को अलविदा कह गईं।