इतना सन्नाटा क्यों- न बादशाह बोला न दबंग, न ही बोल फूटे आमिर के, अक्षय, अजय, बिग-बी भी चुप हैं

New Delhi : शोले फिल्म का वो सुपरहिट डायलॉग ‘इतना सन्नाटा क्यों है भाई’ मौजूदा कंगना प्रकरण के लिए बिलकुल सटीक है। एक कंगना ने आवाज क्या उठाई कि सारी फिल्म इंडस्ट्री को मिर्ची ही लग गयी। उसका मुँह बंद करने के लिये अनुराग कश्यप ,स्वर भास्कर,सोनम कपूर ,तापसी पन्नू जैसे वो कलाकार मैदान में उतर गए है, जिनका एकमात्र मकसद बस विरोध करना है चाहे वो मुद्दा कोई भी हो। ऐसा लगता है जैसे कंगना ने इनके कमजोर नब्ज को पकड़ लिया है। ये वो बॉलीवुड के सितारे हैं जो कल तक ‘फ्रीडम ऑफ़ स्पीच’ की दुहाई देते नहीं थकते थे लेकिन पता नहीं उन्हें आज कौन सा सांप सूंघ गया है।

 

कंगना के सवालों से बॉलीवुड में ऐसा सन्नाटा पसरा है कि मानो पूरी फिल्म इंडस्ट्री मुर्दों की बस्ती गयी हो। आमिर खान, शाहरूख खान और सलमान खान की तिकड़ी जिन्हें पिछले कुछ वर्षों से लगातार डेमोक्रेसी खतरे में ही नजर आयी, आज चुप हैं। उनकी चुप्पी महसूस करने लायक है । महानायक अमिताभ बच्चन की खामोशी भी आज देश को नागवार ही लग रही है। शबाना आज़मी, ये भी एक ऐसी सेलेब्रिटी हैं जिन्हें उनके अपने ही बॉलीवुड के समाज में इतना सब कुछ हो जाने के बावजूद सब कुछ सामान्य ही लग रहा है। सारा देश सुशांत के लिए जस्टिस की मांग कर रहा है और वहीं कुछ सिरफिरे बॉलीवुड कलाकारों को अचानक रिया एकदम से निर्दोष ही नहीं लगने लगी बल्कि उन्हें ऐसा भी लगने लगा कि सारा समाज उस बेचारी अकेली लड़की पर अत्याचार कर रहा है तो जस्टिस फॉर रिया के लिए चिल्लाने लगे । अरे , चुप थे तो चुप ही रहते क्या जरुरत थी अपनी उपस्थिति जताने की और वो भी तब जब रिया को न्यायिक हिरासत में लिया गया। अचानक इनकी बैचैनी बढ़ गयी और तब इन्हें ये अहसास हुआ कि अब यही सही मौका है कि अपनी आवाज स्त्रियों के रहनुमां बनकर ही सही लेकिन उठाई जाए। इसका मतलब तो यही है कि इन लोगों ने एक तरह से अपना निर्णय सुना ही दिया था कि सुशांत का हश्र आज न कल यही होने वाला था। इसमें नयी बात कुछ भी नहीं है इसके लिए इतना चिल्ल-पों मचाने की जरुरत ही क्या है ? रिया के ये हमदर्द ये क्यों भूल गए कि सुशांत के साथ जो भी कुछ हुआ उसकी क्या जांच नहीं होनी चाहिए थी? सच कहें तो , वीमेन कार्ड खेलते – खेलते बॉलीवुड ने अपना वास्तविक चेहरा ही दिखा दिया।

देश दिव्या भारती प्रकरण को अभी ढंग से भूला भी नहीं था कि जिया खान ,दिशा शालियान और अब सुशांत की वही रहस्यमयी ,अस्वभाविक अंत फिर से देखनी पड़ रही है। ये तो वो चंद नाम हैं जो मीडिया में लगातार छाये हुये है लेकिन उनका क्या जिनकी कहानी ना तो कोई सुनाने वाला है और न ही सुननेवाला। उन्हें तो भाग्य भरोसे ही सारे बॉलीवुड ने छोड़ दिया। ये जितने भी मामले हुए हैं सारे के पीछे एक ही तर्क दिया गया है कि ये सारे मानसिक बीमारी से ग्रस्त थे। ऐसे में क्या ये सोंचने वाली बात नहीं है कि आखिर इन मनोरोगियों को पहले ही बॉलीवुड से बाहर का रास्ता क्यों नहीं दिखा दिया गया ? इन्हें फिल्मों में मौका ही क्यों दिया गया ? इनके चाहने वालों को भी ये क्यों नहीं समझ आया कि जिसके वो फैन हैं, वो तो मनोरोगी है।

 

सुशांत को ड्रगी बतानेवाला बॉलीवुड संजय दत्त को आखिर कैसे भूल गया ? उनकी प्रशंसा में तो फ़िल्में बनायी जाती हैं और  हीरो  के रूप में प्रस्तुत भी किया जाता है । फिर सुशांत के साथ ऐसा रवैया क्यों ? बॉलीवुड के ये नायक जिनकी सारी अच्छाई मेकअप के बाद ही अच्छी लगती है । वरना इसके बाद तो इनका चेहरा किस हद तक वीभत्स हो सकता है  जिसका नमूना ये सुशांत का पूरा प्रकरण है । भला हो ,कंगना का जिसने इन्हें अपना असली चेहरा देखने पर मजबूर कर दिया । छोटे शहर के वो लोग जिन्हें फिल्म इंडस्ट्री की चकाचौंध काफी मोहक लगती है उनके लिए ये सच्चाई क्या दिल को झकझोड़ देने वाली नहीं है ?

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