संजय गांधी की चौकड़ी की ग्लैमर गर्ल- दिल्ली में मुसलमानों की खौफ रुखसाना सुलताना

New Delhi: तैमूर को तो सब जानते हैं। उसकी फैन फॉलोअिंग भी है। करीना और सैफ के तैमूर को अभी से मीडिया ने स्टार स्टेटस दे रखा है। लेकिन क्या आप तैमूर की सौतेली नानी के बारे में जानते हैं। एक दौर ऐसा भी था का दिल्ली का एक इलाका उसके नाम से ही कांपता था। दौर था इमरजेंसी और वो कुख्यात हो गई थी मुसलमानों के बीच अपनी नसबंदी परियोजनाओं के लिये और संजय गांधी बेहद नजदीकियों की वजह से। जी हां, हम बात कर रहे हैं सैफ अली खान की पहली पत्नी अमृता सिंह की मां रुखसाना सुल्ताना की।

रुखसाना सुल्ताना इमरजेंसी की ग्लैमरस गर्ल थी, जिसको देखकर अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते थे। वैसे तो रुखसाना एक सोशलाइट थी लेकिन इमरजेंसी के समय में वह संजय गांधी की इतनी करीब आ गईं कि कांग्रेसके बड़े-बड़े नेता उनके आगे पीछे घूमते दिखने लगे। संजय गाँधी की चौकड़ी में रुखसाना महिला किरदार थीं। ये वो दौर था जब इस कातिल हसीना का जलवा अपने पूरे चरम पर था। नेता ही नहीं बड़े कारोबारी भी अपना काम करवाने के लिये रुखसाना की जी हुजूरी में लगे रहते थे। संजय गाँधी से रुखसाना की निकटता मेनका को कभी रास नहीं आयी। इस बात पर दोनों में अक्सर विवाद भी होता था। वैसे विवादों से रुखसाना का काफी गहरा रिश्ता था। इसके बावजूद उनका रुतबा राजनीतिक गलियारों में ज्यों का त्यों बना रहा।
संजय से पहले रुखसाना का राजनीति से कोई लेना देना नहीं था । उनका कनॉट सर्कल में एक बुटिक था। वो हीरे के गहनों का व्यवसाय करती थीं। यह भी एक अद्भुत संयोग ही था कि रुखसाना अपने बुटिक में ही संजय से पहली बार मिलीं थीं। संजय गांधी के लीडरशिप क्वालिटी से रुखसाना इतनी प्रभावित हुईं कि जल्द ही उन्होंने संजय से दुबारा मिलने के लिए अप्वॉइंटमेंट लिया। इस मुलाकात में पार्टी के लिये काम करने की अपनी इच्छा जाहिर की। साल 1975 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के इमरजेंसी के ऐलान के बाद से ही रुखसाना का राजनितिक कद काफी बढ़ गया। संजय ने पुरानी दिल्ली के मुसलमानों को नसबंदी कराने के लिए मोटीवेट करने की अहम् जिम्मेवारी रुखसाना को सौंपी। संजय को यह विश्वास था कि देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा जनसंख्या है जिसको नसबंदी से ही रोका जा सकता है।

सरकार के इस फरमान का आलम ये हुआ कि बूढ़े हों या जवान सबकी नसबंदी जबर्दस्ती कर दी गयी। एक रिपोर्ट के अनुसार 8000 लोगों को नसबंदी करने का टारगेट दिया गया था लेकिन रुखसाना ने 13000 लोगों की नसबंदी कराकर रिकॉर्ड ही कायम कर दिया। संजय की तो खूब वाहवाही लूटी लेकिन पुरानी दिल्ली के मुसलमानों के लिये खौफ का सबब बन गयीं। उस समय तक रुखसाना भारतीय राजनीति में एक चर्चित नाम बन चुकी थीं। रुखसाना का ये ग्लैमर बहुत लम्बे समय तक नहीं चल पाया। जनता पार्टी की सरकार आने के बाद वो धीरे-धीरे राजनीति के पटल से ओझल हो गयीं। कहा जाता है कि रुखसाना का ड्रेसिंग सेंस ऐसा था कि किसी का ध्यान उनपर बरबस खिंचा चला जाता था। सिल्क की साडी और उसपर लो कट ब्लाउज ,गुलाबी चश्मा और परफ्यूम से सना उनका हैंकी उनके काम के विपरीत उनकी पर्सनालिटी की पहचान थी जिसको लेकर वो काफी सजग भी रहती थीं।

रुख्साना ने शिविंदर सिंह से प्रेम विवाह किया था। शिविंदर सुप्रसिद्ध लेखक खुशवंत सिंह के भतीजे थे। वे भारतीय सेना में थे। इनकी शादी बहुत लम्बे समय तक नहीं चली और जल्दी ही तलाक हो गया। दोनों की शादी से एक बच्ची हुई जो कोई और नहीं बल्कि तैमूर की सौतेली मां और अस्सी-नब्बे दशक की मशहूर अभिनेत्री अमृता सिंह हैं। वैसे तो रुखसाना काफी खुले विचारों वाली महिला थीं लेकिन उनकी छवि एक सख्त माँ की थी ।अमृता सिंह और विनोद खन्ना के रिश्ते की चर्चा जब आम हो गयी थी तब उन्होंने अमृता को विनोद से दूर रहकर अपने कैरियर पर ध्यान देने की सख्त हिदायत भी दी। रुखसाना ने दोनों को अलग करने के लिये हर तरह के हथकंडों का भी भरपूर उपयोग किया।

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