रिया का बदला कंगना से लिया शिवसेना ने- प्रबुद्धों की चुप्पी बता रही है कंगना के सारे आरोप सही हैं

New Delhi : और अंततः रिया को जेल जाना ही पड़ा। मुंबई सरकार ने रिया को बचाने के लिए और सुशांत के केस को दबाने का हरसंभव प्रयास किया लेकिन सत्ता के ये धृतराष्ट्र लगता है भूल गए कि उनके सारे प्रपंच को जनता अपनी आँखों से देख रही है । इस बार देश की जनता भी मुंबई पुलिस की जाँच प्रणाली से संतुष्ट नहीं है । ‘जस्टिस फॉर सुशांत’ की मुहिम जो इतने दिनों से चल रही थी उसकी एक छोटी – सी जीत पर आज लोगों ने ढंग से अपनी प्रतिक्रिया भी व्यक्त नहीं की थी कि कुछ उदारवादी विचारधारा के लोगों में एकदम से बेचैनी बढ़ गयी और उन्होंने एक अलग ही बहस छेड़ दिया। किसी को अर्नब की पत्रकारिता से तकलीफ होने लगी तो किसी को इस पूरे मामले में राजनीति की बू आने लगी।

 

वो पत्रकार समूह जो कभी अपने आप को निष्पक्ष पत्रकारिता करने के लिएअपनी पीठ थपथपाते नजर आते थे उनकी भी बेचैनी देखने लायक है । उन्हें मुंबई पुलिस की जांच प्रणाली से शिकायत नहीं है शिकायत है तो उन्हें रिया के खिलाफ जांच होने से रिया एकदम से उन्हें बेचारी लगने लगी और सुशांत जो अब अपनी बात कहने के लिए रहा नहीं उसको ये हाई प्रोफाइल पत्रकारमण्डली अपनी तरफ से नशेड़ी ,गंजेड़ी और न जाने क्या – क्या का तमगा दे चुके हैं । उस समय इस मीडिया को अपनी वो एथिक्स याद नहीं आती है जिसकी वो हर वक्त दुहाई देते नहीं थकते हैं । रिया को जब मुंबई पुलिस अपने संरक्षण में लेकर जांच के लिए ले जाती थी तब इन्होनें बिलकुल चूं तक नहीं बोला कि आखिर मुंबई पुलिस इस बेचारी लड़की के लिए इतनी चिंतित क्यों है ? बिहार पुलिस जब जांच के लिए मुंबई पहुंची तब यही स्कोर्ट लैंड सरीखे मानी जाने वाली मुंबई पुलिस का बर्ताव क्या ये बुद्धिजीवी कहें जाने वाले पत्रकारों को सामान्य लगा ? तब तो इनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी , सच कहें तो आज अर्नब की बेथके पत्रकारिता का ही परिणाम है कि जिसने सुशांत सिंह राजपूत मामले को दूसरे केस की तरह ठन्डे बस्ते में नहीं जाने दिया बल्कि न्याय के लिए भी अपनी आवाज लगातार उठा रहा है ।

सुशांत प्रकरण पर महाराष्ट्र सरकार की थ्योरी पर यकीन कर पाना भारत के उस ले मैन के लिए भी बिलकुल विश्वास से परे है जिसने अमेरिका और इंग्लैंड से अपनी पढाई नहीं की है। सुशांत को गए हुए करीब तीन महीना होने को आया इस दौरान बॉलीवुड और मीडिया के वो ‘वाइट कालर’ लोग जो हर बात- बेबात अपनी प्रतिक्रिया देते थकते नहीं थे उनमें एक अजीब सी चुप्पी छाई हुई थी जिसका अंत आज रिया के जेल जाने की घोषणा के बाद हुआ है ।

इनमें से कुछ लोग जो कभी सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे और आज जब जांच चल रही है तब भी ये बौखलाए हुए हैं । इसमें भी इनकी दो टके की एक्टिंग का पोल खुल गयी है । यही बॉलीवुड है जो कभी अपने आपको एक परिवार कहते नहीं थकता था वो यह भी भूल गया कि सुशांत उनके इसी परिवार का एक नया सदस्य था। सच्चाई तो यह है कि सुशांत प्रकरण ने मीडिया के सारे लीजेंड की पोल पूरी तरह खोल कर रख दी है । किसी पार्टी विशेष का विरोध करते – करते ये प्रबुद्ध लोगों का ग्रुप आज अपना रास्ता ही भटक ही गया है । इन्होनें अपने आपको बिन पेंदी का लोटा बना लिया है जिसको कोई सिद्धांत नहीं है । दूसरे को चाटुकार कहते – कहते ये पत्रकार खुद ही चाटुकारिता की सारी सीमाएं लांघ चुके हैं । उनसे पूछना चाहिए कि वो जिस तरह की पत्रकारिता कर रहे हैं क्या उसे वो कहीं से भी निष्पक्ष कह पायेंगे ?

 

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